15 August 2007 ~ View Comments ~ Share ~

सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है.
देखना है ज़ोर कितना बाजू-ए-कातिल में है
करता नहीं क्यों दूसरा कुछ बात चीत,
देखता हूँ मैं जिसे वोह चुप तेरी महफिल में है.
ए शहीद-ए-मुल्क-ओ-मिल्लत मैं तेरे ऊपर निसार,
अब तेरी हिम्मत का चर्चा ग़ैर की महफिल में है.
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है.
वक्त आने दे बता देंगे तुझे ए आस्मान,
हम अभी से क्या बतायें क्या हमारे दिल में है
खिंच कर लाई है सब को क़त्ल होने कि उम्मीद,
आशिकों का आज जमघट कूचा-ए-कातिल में है
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है.
है लिए हथियार दुश्मन ताक में बैठा उधर,
और हम तैयार हैं सीना लिए अपना इधर.
खून से खेलेंगे होली ग़र वतन मुश्किल में है,
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है.
हाथ जिन में हो जूनून कटते नही तलवार से,
सर जो उठ जाते हैं वोह झुकते नही ललकार से.
और भड्केगा जो शोला-सा हमारे दिल में है,
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है.
हम तो घर से निकले ही थे बाँध कर सर पे कफन,
जान हथेली पर लिए लो भर चले हैं ये क़दम.
जिन्दगी तो अपनी मेहमान मौत की महफिल में है,
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है.
दिल में तूफानों की टोली और नसों में इन्कलाब,
होश दुश्मन के उड़ा देंगे हमें रोको ना आज.
दूर रह पाए जो हमसे दम कहाँ मंज़िल में है,
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है.
देखना है ज़ोर कितना बाजू-ए-कातिल में है.

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